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Showing posts from March, 2019

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वो कौनसी बातें हैं जो अभिभावकों को ई.सी. सी. ई. प्रोग्राम के बारे में पता होनी चाहिए?

ई.सी.सी.ई.प्रोग्राम नौनिहालों की विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।इसकी अपनी कुछ विशेषताएँ होती हैं जो बच्चों के सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करती हैं।
यह प्रोग्राम 3 -6 साल तक के बच्चों के लिए है ,ना कि प्राथमिक वर्ग के बच्चों के लिए। यह एक बाल-केंद्रित प्रोग्राम है ना कि अध्यापक-केंद्रित अर्थात यहाँ जो कुछ भी किया जाता है वो बच्चो को ध्यान में रखकर किया जाता है ना कि टीचर्स को। यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो स्कूल में बच्चों के अच्छे प्रदर्शन पर जोर देता है ना कि स्कूल की प्रसिद्धि बढ़ाने पर। यह बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए "खेल-खेल में सीखने की प्रणाली"पर जोर देता है। यहाँ स्कूल की कोशिश यही होती है कि जितना ज्यादा हो सके बच्चे को खेलते-खेलते ही नई-नई चीजों के संपर्क में लाया जाए। वो खिलौनों के माध्यम से सीखने लगे। यह एक ऐसा प्रोग्राम है जो बच्चे को प्राथमिक स्कूल में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार करता है।  यह 3 -R के विकास के लिए आधार प्रदान करता है यहाँ 3 -R से मतलब है :-
Reading-पढ़ना 
Writing-लिखना 
Arithmatic-अंकों का ज्ञान  यह प्रोग्राम बच…

"बच्चे में विकास के किन पहलुओं पर जोर देता है एक प्ले या प्री-प्राइमरी स्कूल"

शारीरिक विकास:-
जब एक बच्चा पहली बार प्ले या नर्सरी स्कूल में जाता है तो अभी भी वह डगमगा कर ही चल रहा होता है | वह अक्सर चलते या दौड़ते हुए गिर जाता है | वह बिना सहारे के सही से सीढ़ियाँ भी नहीं चढ़ सकता क्योकि उसकी मांसपेशियाँ अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती हैं |
नर्सरी स्कूल बच्चे के आंतरिक और बाह्य विकास के लिए उचित परिवेश उपलब्ध कराते हैं | ये स्कूल बच्चों की छोटी और मानसिक माँसपेशियों के विकास के लिए आंतरिक गतिविधियों पर जोर देते हैं | जैसे -पेपर फाड़ना ,पेपर को काटना ,पेपर को चिपकाना ,चित्रकारी करना और धागे में मोती पिरोना इत्यादि |
इसी तरह मजबूत माँसपेशियों के विकास के लिए बाहय गतिविधियों पर जोर देते हैं | जैसे -पेड़ पर चढ़ना ,कूदना ,फिसलपट्टी पर फिसलना ,झूले झूलना और पेडलिंग आदि |
ये गतिविधियाँ बच्चों के आंतरिक और बाहरी विकास के लिए आवश्यक होती हैं और बच्चा जब इन्हें अपने हमउम्र साथियों के साथ मिलकर करता है तो उसकी खुशी एक अलग ही स्तर पर होती है जिसे अभिभावक उसके घर लौटने पर (बच्चे के )उसके चेहरे पर झलकते हुए साफ़ देख सकते हैं |

अच्छी आदतों का विकास :-
एक प्ले स्कूल में बच्चों को ए…

प्रारंभिक बचपन की देखभाल व शिक्षा

प्रारंभिक बचपन की अवधि बच्चे के जन्म के बाद से 8वर्ष तक मानी गई है।यहाँ प्रारंभिक बचपन की देखभाल से तात्पर्य उन तथ्यों को पहचानने से है जो बच्चों की सुरक्षा और पालन-पोषण के लिए आवश्यक है।बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के साथ-साथ उनकी मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक आवश्यकताएँ भी पूरी होनी चाहिए।

‌'प्रारंभिक बचपन की शिक्षा' का अर्थ है -वह प्रकिया जिसमे बच्चा अपना ज्ञान और कौशल बढ़ाता है।समय के साथ-साथ नई आदतें और मनोभाव सीखता और बनाता है।यह बच्चों के आंतरिक विकास के लिए बहुत आवश्यक है।
‌प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण बिंदु है खेल :-
‌प्रारंभिक बचपन की शिक्षा पूरी तरह से बाल केंद्रित है अर्थात बच्चे के इर्द- गिर्द ही घूमती है।इस कारण इसमें खेल की महत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।. बच्चों को सक्रिय रुप से खोजबीन करने, कुशलतापूर्वक काम करने और दूसरों से मिलने-जुलने का वातावरण प्रदान करते हैं।खेल बचपन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।खेल-खेल में बच्चा अपने आस-पास की दुनिया से सीखता है और अपने अंदर की भावनात्मक दुनिया में नित्य नये प्रयोग करता है।
बच्चे के लिए बहुत जरूरी है कि वह…